CHANA SATTU ATTA (500g) Sale

CHANA SATTU ATTA (500g)

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Product Code: CHANA SATTU ATTA (500g)

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Chana Sattu is a delicious and healthy delicacy sourced from the land of Bihar. Desi Atta Company’s Chana Sattu Atta can be served in a variety of ways including a refreshing drink and porridge.

Specialty- Protein Rich Flour, Gluten Free


सतुआ-SATUWA
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आयुर्वेद के अनुसार सतुआ का सेवन गले के रोग, उल्टी, आंखों के रोग, भूख, प्यास और कई अन्य रोगों में फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि पाया जाता है। यह शरीर को ठंडक पहुंचाता है सतुआ पीना सबके लिए फायदेमंद है ।

सतुआ बनाने की विधि 
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बदाम (चना) को 4-6 घंटे तक पानी में डालकर अच्छी तरह फूलने दे, उसके बाद साफ पानी से धोकर छान लें। पानी निकल जाने पर इसे कड़ी धूप में 75% सुखाकर समेट लें फिर भट्टी पर कराही में नमक डालकर गरम करें। नमक गर्म होने के बाद छोटे-छोटे घानी बनाकर बदाम को अच्छी तरह भून लें । अब भूनें हुए चने का 90% छिलका निकाल कर बरिक पिसबा लें। इस प्रकार अब आपका चने का सतुआ तैयार है। इसी प्रक्रिया से जौ का सतुआ भी बनाया जाता है।

बदाम (चना) के सतुआ में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। यह हृदय को शक्ति प्रदान करता है और शरीर को लू लगने से बचाता है।

जौ का सतुआ :- जौ का सतुआ शीतल, अग्नि प्रदीपक, हलका, दस्तावर (कब्जनाशक), कफ तथा पित्त का शमन करने वाला होता है। इसे जल में घोलकर पीने से यह बलवर्द्धक, पोषक, पुष्टिकारक, मल भेदक, तृप्तिकारक, मधुर, रुचिकारक और पचने के बाद तुरन्त शक्ति दायक होता है। यह कफ, पित्त, थकावट, भूख, प्यास और नेत्र विकार नाशक होता है।

जौ-चने का सतुआ :- तीन पाव चना का सतुआ और एक पाव जौ का सतुआ मिलाकर जौ चने का सतुआ बनाया जाता है। इस सतुआ को पानी में घोलकर, घी-शकर मिलाकर पीना ग्रीष्मकाल में बहुत हितकारी, तृप्ति दायक, शीतलता देने वाला होता है। 

सतुआ सेवन विधि :- इनमें से किसी भी सतुआ को पतला पेय बनाकर पी सकते हैं या लस्सी की तरह गाढ़ा रखकर चम्मच से खा सकते हैं। इसे मीठा करना हो तो उचित मात्रा में देशी शक्कर या गुड़ पानी में घोलकर सतुआ इसी पानी से घोलें। नमकीन करना हो तो उचित मात्रा में भूना हुआ पिसा जीरा, सौफ,कालीमिर्च सेंधा नमक पानी में डालकर इसी पानी में सतुआ घोलें। इच्छा के अनुसार इसे पतला या गाढ़ा रख सकते हैं। सतुआ अपने आप में पूरा भोजन है, यह एक सुपाच्य, हलका, पौष्टिक और तृप्तिदायक शीतल आहार है, इसीलिए इसका सेवन ग्रीष्म काल में किया जाता है।

सतुआ के विभिन्न नाम-
भारत की लगभग सभी आर्य भाषाओं में सतुआ शब्द का प्रयोग मिलता है, जैसे:- मैथिली, पाली प्राकृत और भोजपुरी में सतुआ, कश्मीरी में सोतु, कुमाउनी में सातु-सत्तू, पंजाबी में सत्तू, सिन्धी में सांतू, गुजराती में सातु तथा हिन्दी में सत्तू एवं सतुआ कहते हैं।

सतुआ के लाभ : चिकित्सा विज्ञान की कई खोजों में यह दावा किया गया है कि पेट की बीमारियों में सतुआ बहुत गुणकारी है। मधुमेह के रोगियों के लिए का "जौ" का सतुआ रामबाण है।

बाजार में बिकने वाली शीतल पेय पीने से शरीर में कई बीमारियां होती हैं, लेकिन चने के सतुआ का सेवन ख़ासकर गर्मी के मौसम में पेट की बीमारियों तथा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। 

डॉक्टरो का कहना है कि बदाम के सतुआ का सेवन हर आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं, लेकिन जोड़ों के दर्द के रोगी को इसके सेवन से बचना चाहिए।

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